Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत खैरबानी पंचायत के जानुमटांडी टोला में गुडराघाटी नदी पर पुलिया नहीं होने से बरसात में आवागमन ठप, स्कूली बच्चों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी
Jamshedpur News : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड स्थित खैरबानी पंचायत के खैरबानी गांव के टोला जानुमटांडी में गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है।
Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत खैरबानी पंचायत के खैरबानी गांव स्थित टोला जानुमटांडी में गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण की मांग तेज हो गई है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने और आवागमन पूरी तरह बाधित होने से परेशान ग्रामीणों ने नदी पर खड़े होकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द गुडराघाटी नदी पर पुलिया या पुल का निर्माण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर वर्ष बारिश के मौसम में जानुमटांडी टोला के लोगों को नदी पार करने के लिए गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही ग्रामीणों का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इस कारण बच्चों की शिक्षा, मरीजों की स्वास्थ्य सुविधा और ग्रामीणों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।
खैरबानी गांव के टोला जानुमटांडी में स्थित गुडराघाटी नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बरसात के दौरान तेज बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, पानी बढ़ने के बाद पैदल नदी पार करना भी जोखिम भरा हो जाता है। तेज बहाव के बीच लोगों को नदी पार करनी पड़ती है, जिससे किसी भी समय हादसा होने का खतरा बना रहता है। दोपहिया, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों का नदी पार करना लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को कई जरूरी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर नदी का पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है।
बरसात के मौसम में कई बार नदी में इतना अधिक पानी भर जाता है कि गांव के लोगों का आवागमन पूरी तरह से रुक जाता है। इससे ग्रामीणों को आवश्यक सामान लाने से लेकर बच्चों को स्कूल भेजने तक में परेशानी होती है।
गुडराघाटी नदी पर पुलिया नहीं होने का सबसे बड़ा असर गांव के स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर अभिभावक अपने बच्चों को गोद और कंधे पर उठाकर नदी पार कराने को मजबूर होते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि छोटे बच्चों के लिए नदी पार करना बेहद जोखिम भरा होता है। पानी का बहाव तेज होने पर बच्चे खुद नदी पार नहीं कर सकते। ऐसे में अभिभावक उन्हें अपनी गोद या कंधे पर बैठाकर दूसरी ओर पहुंचाते हैं। यह स्थिति बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है।
कई बार नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि अभिभावक बच्चों को स्कूल भेज ही नहीं पाते। इसके कारण बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान बच्चों की स्कूल में उपस्थिति कम हो जाती है और कई बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को आज भी स्कूल पहुंचने के लिए ऐसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।
यदि किसी व्यक्ति की अचानक तबीयत खराब हो जाए या कोई गंभीर मरीज हो, तो उसे वाहन के जरिए अस्पताल तक पहुंचाना आसान नहीं होता। नदी का जलस्तर बढ़ने पर वाहन नदी पार नहीं कर सकते। ऐसे में मरीज को नदी पार कराने के लिए ग्रामीणों को अलग-अलग उपाय करने पड़ते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के मामले में यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से किसी भी मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। यही वजह है कि ग्रामीण गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण को केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और जीवन से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इस संबंध में कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाई जा चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने मुखिया, विधायक और सांसद समेत अन्य जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी समस्या रखी है। प्रशासन को भी लिखित आवेदन देकर नदी पर पुल या पुलिया निर्माण कराने की मांग की गई है। इसके बावजूद अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनकी मांग वर्षों से केवल आश्वासन और कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के समय समस्या गंभीर हो जाती है और पानी कम होने के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उन्हें कब तक इसी तरह नदी पार करके जोखिम भरा जीवन जीना पड़ेगा।
गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। ग्रामीण नदी पर खड़े होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से समस्या उठाए जाने के बावजूद यदि अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन आज भी जानुमटांडी टोला के लोगों को बरसात के दिनों में नदी पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं चाहिए, बल्कि गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण की दिशा में जल्द ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
ग्रामीणों का मानना है कि गुडराघाटी नदी पर एक पुलिया या मजबूत पुल का निर्माण हो जाने से जानुमटांडी टोला और आसपास के लोगों की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।
पुलिया निर्माण से बच्चों को बारिश के दिनों में सुरक्षित तरीके से स्कूल आने-जाने की सुविधा मिलेगी। मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा और ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज के लिए नदी का जोखिम भरा रास्ता पार नहीं करना पड़ेगा।
इसके अलावा दोपहिया, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन भी संभव हो सकेगा। इससे स्थानीय लोगों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में आसानी होगी।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द स्थल का निरीक्षण कर पुलिया निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या हर वर्ष बरसात के दौरान सामने आती है और यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग केवल एक निर्माण कार्य की नहीं है, बल्कि यह उनके सुरक्षित जीवन, बच्चों की शिक्षा और मरीजों के समय पर इलाज से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
अब देखना होगा कि गुडराघाटी नदी पर पुलिया निर्माण की ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब तक ठोस कदम उठाते हैं। फिलहाल बरसात के मौसम में जानुमटांडी टोला के ग्रामीणों की मुश्किलें बनी हुई हैं और पुल निर्माण की मांग को लेकर उनकी आवाज लगातार तेज होती जा रही है।
















