Dhanbad News : झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में तीन दशक तक सक्रिय रहे पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी संगठन के रणनीतिक ढांचे पर सबसे बड़ा प्रहार मान रही हैं।
Dhanbad News : एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा झारखंड में गिरफ्तार। 130 से अधिक मामलों में आरोपी पोलित ब्यूरो सदस्य की गिरफ्तारी से सारंडा-कोल्हान में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Dhanbad News : झारखंड में सुरक्षा एजेंसियों को माओवादी विरोधी अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। करीब तीन दशकों तक झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जंगलों में सक्रिय रहे एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा, भास्कर दा, सुनिर्मल दा और प्रधान दा को गिरफ्तार कर लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे केवल एक बड़े उग्रवादी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे माओवादी संगठन के रणनीतिक ढांचे पर करारा प्रहार मान रही हैं।
मिसिर बेसरा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय सैन्य नेतृत्व का हिस्सा और पूर्वी भारत में माओवादी गतिविधियों का सबसे बड़ा रणनीतिकार माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी से झारखंड के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को गंभीर झटका लगा है।
गिरिडीह के गांव से शुरू हुआ माओवादी सफर
मिसिर बेसरा का जन्म झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र स्थित मदनाडीह गांव में हुआ था। वह स्नातक शिक्षित था और छात्र जीवन के दौरान ही तत्कालीन माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के नेता किशन दा के संपर्क में आया।
संगठन के प्रति उसकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई। वर्ष 1985 में एमसीसी के राष्ट्रीय सम्मेलन में उसने वालंटियर के रूप में भाग लिया। इसके बाद 1986 में उसे संगठन की औपचारिक सदस्यता मिली और यहीं से उसका उग्रवादी जीवन शुरू हुआ।

कैसे बन गया माओवादी संगठन का सबसे बड़ा रणनीतिकार
मिसिर बेसरा ने संगठन में लगातार ऊंचे पद हासिल किए और धीरे-धीरे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया।
संगठन में उसकी प्रमुख जिम्मेदारियां
- 1985 – एमसीसी राष्ट्रीय सम्मेलन में वालंटियर।
- 1986 – प्राथमिक सदस्यता प्राप्त।
- 1990 – प्रचार-प्रसार एवं प्रेस कार्य की जिम्मेदारी।
- 1992 – रांची एवं आसपास के जिलों में संगठन विस्तार।
- 1997 – दक्षिण छोटानागपुर कमेटी के गठन में अहम भूमिका।
- 2000 – झारखंड रीजनल कमेटी के गठन में प्रमुख योगदान।
- 2003 – केंद्रीय समिति सदस्य बना।
- 2004 – सीपीआई (माओवादी) के गठन के बाद केंद्रीय सैन्य नेतृत्व और पोलित ब्यूरो सदस्य बना।
इन्हीं जिम्मेदारियों के चलते वह संगठन का सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार बन गया।
130 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मिसिर बेसरा के खिलाफ 130 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें कई गंभीर अपराध शामिल हैं।
दर्ज प्रमुख आरोप
- हत्या
- हत्या का प्रयास
- पुलिस बल पर हमला
- आपराधिक साजिश
- विस्फोटक पदार्थ अधिनियम
- आर्म्स एक्ट
- यूएपीए (UAPA)
- सीएलए एक्ट
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज विभिन्न मामले
- लेवी वसूली
- प्रतिबंधित संगठन के संचालन से जुड़े अपराध
पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ सबसे अधिक मामले पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा, टोंटो, छोटानागरा, जराइकेला, सोनुआ, गुवा, किरीबुरू, टेबो और मुफस्सिल थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं।
2020 के बाद तेजी से बढ़ी गतिविधियां
पुलिस प्रोफाइल बताती है कि वर्ष 2020 के बाद मिसिर बेसरा के खिलाफ लगातार नए मामले दर्ज हुए। वर्ष 2023, 2024 और 2025 के दौरान भी उसके नाम पर कई नए मुकदमे दर्ज किए गए।
इन मामलों में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, विस्फोटक का इस्तेमाल, हत्या, लेवी वसूली तथा प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों का संचालन जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
इतने बड़े आपराधिक रिकॉर्ड के बावजूद वह लगातार सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचता रहा और जंगलों से संगठन का संचालन करता रहा।
सारंडा-कोल्हान बना था उसका सबसे सुरक्षित गढ़
पुलिस के अनुसार वर्तमान समय में मिसिर बेसरा का सबसे बड़ा ऑपरेशन एरिया सारंडा और कोल्हान क्षेत्र था।
उसकी गतिविधियां मुख्य रूप से जराइकेला, छोटानागरा और मनोहरपुर थाना क्षेत्रों के घने जंगलों में संचालित होती थीं।
इसके अलावा सारंडा के कई गांव उसके सुरक्षित ठिकानों के रूप में चिन्हित थे, जिनमें—
- तुंबाहाका
- पाटाटोरोप
- रेंगड़ाहातु
- अंजेदबेड़ा
- मुरुमबुरु
- चिरियाबेड़ा
- जोरोयुली
- सारजामबुरु
- बलिबा
- थोलकोबाद
- तिरिलपोसी
- राधापोड़ा
- होलोंगुली
- रेडा
- समता
- रातामाटी
- बाटीदिरी
जैसे दर्जनों गांव शामिल हैं।
जंगल में नहीं, रणनीति के केंद्र में था मिसिर बेसरा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मिसिर बेसरा की पहचान केवल हथियार उठाने वाले कमांडर की नहीं थी। वह संगठन की रणनीति तैयार करने वाला शीर्ष नेता था।
पोलित ब्यूरो सदस्य होने के कारण वह विभिन्न माओवादी दस्तों के बीच समन्वय स्थापित करता था। किस क्षेत्र में कौन-सा दस्ता सक्रिय रहेगा, कहां संगठन का विस्तार होगा और किस तरह नए कैडरों की भर्ती एवं प्रशिक्षण होगा, इन सभी विषयों पर अंतिम रणनीति तैयार करने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
यही कारण था कि उसे पूर्वी भारत में माओवादी संगठन का सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार माना जाता था।
लेवी नेटवर्क पर भी थी मजबूत पकड़
पुलिस दस्तावेजों के अनुसार माओवादी संगठन की आर्थिक व्यवस्था में भी मिसिर बेसरा की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
माओवादी प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण, खनन और अन्य विकास कार्यों से जुड़े ठेकेदारों से लेवी वसूली संगठन की आय का प्रमुख स्रोत थी। इसी धन का उपयोग हथियार खरीदने, कैडरों के प्रशिक्षण और संगठन के संचालन में किया जाता था।
पुलिस का मानना है कि इस वित्तीय नेटवर्क की निगरानी शीर्ष नेतृत्व स्तर पर होती थी और मिसिर बेसरा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी केवल एक बड़े माओवादी नेता की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि संगठन की रणनीतिक, सैन्य और संचालन व्यवस्था को कमजोर करने वाली बड़ी कार्रवाई है।
पिछले कई वर्षों से सुरक्षा बल सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में लगातार अभियान चला रहे थे। इस अभियान के दौरान कई नक्सली मारे गए, कई ने आत्मसमर्पण किया और अब शीर्ष नेतृत्व के इस बड़े चेहरे की गिरफ्तारी को अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
आगे की चुनौती
हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े नेता की गिरफ्तारी से संगठन को तत्काल झटका जरूर लगता है, लेकिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति के लिए सुरक्षा अभियान के साथ-साथ विकास, शिक्षा, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है।
फिलहाल मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बढ़ाया है और माना जा रहा है कि इससे सारंडा-कोल्हान समेत पूर्वी भारत में माओवादी संगठन की गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

















