Jamshedpur News : CSR फंड के नाम पर 3 करोड़ की साइबर ठगी, मुख्य आरोपी गिरफ्तार, NGO से संगठित धोखाधड़ी का खुलासा

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Jamshedpur News : जमशेदपुर साइबर थाना पुलिस ने उत्तर प्रदेश के आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ रघु को किया गिरफ्तार, ईमेल और इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस लेकर पांच दिनों में करीब 3 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप।

Jamshedpur News : जमशेदपुर में CSR फंड दिलाने के नाम पर एक NGO से 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मुख्य आरोपी गिरफ्तार। पुलिस जांच में ईमेल एक्सेस, इंटरनेट बैंकिंग और फर्जी बैंकिंग गतिविधियों का बड़ा खुलासा।

जमशेदपुर में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड दिलाने का झांसा देकर करीब 3 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया। इस मामले में जमशेदपुर साइबर अपराध थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ रघु को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से बैंक खाते, ईमेल और इंटरनेट बैंकिंग का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का लेनदेन किया।

रीना पाण्डेय की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

जानकारी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 18 जून को हुई, जब पीड़ित संस्था की प्रतिनिधि रीना पाण्डेय ने साइबर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दो नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने संस्था को बड़ी राशि का CSR फंड दिलाने का भरोसा दिया और इसी बहाने संस्था के बैंकिंग दस्तावेजों और डिजिटल एक्सेस पर कब्जा कर लिया।

CSR फंड दिलाने का दिया गया झांसा

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने NGO को भरोसा दिलाया कि वे विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियों से CSR फंड उपलब्ध करा सकते हैं। इस योजना के तहत संस्था का एक्सिस बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया गया।

इसके बाद बैंक खाते के सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर आरोपियों ने संस्था से चेकबुक, बैंक से जुड़ा सिम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। संस्था के प्रतिनिधियों को यह विश्वास दिलाया गया कि यह पूरी प्रक्रिया फंड जारी करने के लिए आवश्यक है।

पांच दिनों में करीब 3 करोड़ रुपये का लेनदेन

सिटी एसपी ललित मीणा ने बताया कि जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मुख्य आरोपी अमन कुमार सिंह उर्फ रघु ने 22 दिसंबर 2025 को पीड़िता को बहला-फुसलाकर चेकबुक और बैंकिंग से जुड़ा सिम कार्ड अपने साथ लखनऊ ले गया।

वहां उसने अपने अन्य साइबर अपराधी साथियों के साथ मिलकर केवल पांच दिनों के भीतर लगभग 3 करोड़ रुपये का जमा और निकासी कर दी। पुलिस के अनुसार यह पूरी कार्रवाई बेहद सुनियोजित और संगठित तरीके से की गई, जिससे साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क की भी आशंका जताई जा रही है।

ईमेल और इंटरनेट बैंकिंग का पहले ही ले लिया था एक्सेस

पुलिस अनुसंधान में एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि आरोपी ने अक्टूबर 2025 में ही NGO की प्रतिनिधि की ईमेल आईडी और इंटरनेट बैंकिंग का एक्सेस अपने मोबाइल फोन में प्राप्त कर लिया था।

यही डिजिटल एक्सेस बाद में पूरे फर्जीवाड़े की सबसे बड़ी कड़ी साबित हुआ। पुलिस का मानना है कि आरोपी पहले से संस्था की बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रख रहा था और सही समय आने पर उसने पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया।

मुख्य आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल फोन बरामद

साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी 29 वर्षीय अमन कुमार सिंह उर्फ रघु को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मूल रूप से देवरिया (उत्तर प्रदेश) का निवासी है और वर्तमान में आदित्यपुर, सरायकेला-खरसावां में रह रहा था।

गिरफ्तार आरोपी के पास से वीवो कंपनी का एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। पुलिस अब इस मोबाइल के डिजिटल डेटा की जांच कर रही है ताकि साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा सके।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस के अनुसार इस साइबर ठगी में केवल एक व्यक्ति शामिल नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय होने की आशंका है। इसी कारण मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ईमेल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह के अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

NGO और संस्थाओं के लिए पुलिस की सलाह

इस मामले के बाद पुलिस ने सभी सामाजिक संस्थाओं, ट्रस्ट और NGO को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था के कहने पर बैंक खाते की चेकबुक, सिम कार्ड, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन या ईमेल एक्सेस साझा नहीं करना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति CSR फंड दिलाने या सरकारी अनुदान दिलाने के नाम पर बैंकिंग दस्तावेज मांगता है, तो उसकी पूरी तरह जांच-पड़ताल करना आवश्यक है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर पुलिस को देने की अपील की गई है।

साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर में साइबर अपराधी अब केवल आम लोगों को ही नहीं बल्कि NGO, ट्रस्ट, स्टार्टअप और छोटे व्यवसायों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। फर्जी CSR फंड, सरकारी योजना, निवेश और अनुदान के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर बैंकिंग और डिजिटल जानकारी हासिल की जा रही है।

ऐसे मामलों में थोड़ी सी लापरवाही भी करोड़ों रुपये के नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

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