Jamshedpur News : NCLT से स्वीकृति मिलने के बाद वेदांता ने इंकैब इंडस्ट्रीज की संपत्तियों पर अधिकार जताते हुए अवैध कब्जाधारियों को जारी किया कानूनी नोटिस, 25 वर्षों से रह रहे सैकड़ों परिवारों में चिंता का माहौल।
Jamshedpur News : जमशेदपुर के केबुल टाउन में वेदांता लिमिटेड की बड़ी कार्रवाई। इंकैब इंडस्ट्रीज की संपत्तियों पर रह रहे 1200 से अधिक परिवारों को आवास खाली करने का कानूनी नोटिस जारी। जानिए NCLT के फैसले, पूरी कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति।
झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर के प्रसिद्ध केबुल टाउन (इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड) में रहने वाले करीब 1000 से 1200 परिवारों के सामने अब अपने आशियाने को बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। लंबे समय से कंपनी के क्वार्टरों, फ्लैटों और बंगलों में रह रहे लोगों को वेदांता लिमिटेड ने कानूनी नोटिस जारी कर जल्द से जल्द आवास खाली करने का निर्देश दिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे केबुल टाउन इलाके में चिंता और अनिश्चितता का माहौल है।

बताया जा रहा है कि वेदांता ने यह कदम राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की कोलकाता पीठ द्वारा उसके रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी मिलने के बाद उठाया है। कंपनी का कहना है कि अब इंकैब इंडस्ट्रीज की सभी चल और अचल संपत्तियों पर उसका वैधानिक अधिकार है, इसलिए बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति का वहां रहना कानूनन उचित नहीं है।
25 वर्षों से रह रहे परिवारों के सामने बड़ा संकट
इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अप्रैल 2000 में बंद होने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी, उनके परिवार और अन्य लोग कंपनी के आवासों में ही रहने लगे थे। समय के साथ इन मकानों में कई पूर्व कर्मचारी, उनके परिजन तथा अन्य लोगों ने भी निवास करना शुरू कर दिया।
करीब ढाई दशक बाद अब जब संपत्ति का स्वामित्व वेदांता के पास पहुंच चुका है, तब कंपनी ने इन सभी कब्जाधारियों को कानूनी नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। इससे वर्षों से यहां रह रहे परिवारों के सामने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
पूर्व अधिकारियों और रसूखदार लोगों को भी नोटिस
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनी ने केवल सामान्य कब्जाधारियों को ही नहीं, बल्कि कई प्रभावशाली लोगों को भी नोटिस जारी किया है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व सिटी डीएसपी के परिवार, उनकी पत्नी समेत कई पूर्व अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को भी बंगले खाली करने के लिए लीगल नोटिस भेजा गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कंपनी अपनी संपत्तियों को लेकर किसी प्रकार की रियायत देने के पक्ष में नहीं है।
NCLT के फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई
3 दिसंबर 2025 को एनसीएलटी की कोलकाता पीठ ने इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड के संबंध में वेदांता लिमिटेड के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। इस फैसले के बाद कंपनी को इंकैब की परिसंपत्तियों पर अधिकार प्राप्त हुआ।
इसी कानूनी प्रक्रिया के आधार पर अब वेदांता अपने स्वामित्व वाली संपत्तियों को खाली कराने और उनका नियंत्रण वापस लेने की दिशा में कार्रवाई कर रही है। कंपनी का कहना है कि संपत्ति पर बिना वैध अनुमति के कब्जा बनाए रखना गैर-कानूनी है।
कितने आवास हैं कार्रवाई के दायरे में?
केबुल टाउनशिप में कंपनी के बड़ी संख्या में आवास मौजूद हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्रवाई के दायरे में आने वाले प्रमुख आवास इस प्रकार हैं—
- कुल क्वार्टर, फ्लैट और बंगले – लगभग 1000 से 1200
- एल-4 क्वार्टर – लगभग 200 से 225
- सुरक्षा कर्मियों के सी-टाइप क्वार्टर – लगभग 100
- डी-5 और जी-4 क्वार्टर
- तीन मंजिला फ्लैट
- विभिन्न श्रेणी के बंगले
इन सभी परिसरों में वर्षों से लोग निवास कर रहे हैं, जिनमें पूर्व कर्मचारी, उनके परिवार और अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
वेदांता ने जारी की सार्वजनिक चेतावनी
कंपनी ने केवल नोटिस जारी करने तक ही अपनी कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। वेदांता ने सार्वजनिक सूचना जारी कर लोगों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि वे किसी भी दलाल या बिचौलिए के झांसे में न आएं।
कंपनी ने कहा है कि संबंधित संपत्तियों की खरीद-बिक्री, किराये पर देने या किसी भी प्रकार का लेन-देन पूरी तरह अवैध माना जाएगा। ऐसा करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और जेल तक की नौबत आ सकती है।
इस चेतावनी का उद्देश्य संपत्तियों से जुड़े किसी भी अवैध सौदे को रोकना बताया जा रहा है।
प्रभावित परिवारों की बढ़ी चिंता
करीब 25 वर्षों से इन आवासों में रह रहे परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन यहीं बिताया है। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और सामाजिक जीवन इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। ऐसे में अचानक आवास खाली करने के नोटिस से उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
कई परिवारों का मानना है कि यदि उन्हें मकान खाली करना ही पड़े, तो पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए ताकि वर्षों से बसे लोगों को अचानक बेघर होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।
हालांकि इस विषय पर कंपनी की ओर से पुनर्वास संबंधी किसी औपचारिक योजना की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कानूनी और सामाजिक दोनों पहलुओं पर चर्चा
यह मामला केवल संपत्ति के स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर कंपनी अपने कानूनी अधिकारों के आधार पर संपत्तियों का नियंत्रण वापस लेने की प्रक्रिया में है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन, कंपनी और प्रभावित परिवारों के बीच संवाद स्थापित होता है, तो समाधान का कोई संतुलित रास्ता निकल सकता है। इससे कानूनी प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी और लोगों की सामाजिक सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नोटिस मिलने के बाद प्रभावित परिवार क्या कदम उठाते हैं। संभावना है कि कुछ लोग कानूनी विकल्प अपनाएं, जबकि कुछ कंपनी से समय या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर सकते हैं।
वहीं वेदांता ने संकेत दिया है कि यदि नोटिस के बावजूद परिसर खाली नहीं किया गया, तो कंपनी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
फिलहाल केबुल टाउन का यह मामला जमशेदपुर ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इससे एक साथ बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
















